Gurjar History : मारवाड़ी मसाला

Gurjar History

Showing posts with label मारवाड़ी मसाला. Show all posts
Showing posts with label मारवाड़ी मसाला. Show all posts

Sunday, February 16, 2020

जिंदगी क्या है?



-कभी तानों में कटेगी,
कभी तारीफों में;
ये जिंदगी है यारों,
पल पल घटेगी !!
-पाने को कुछ नहीं,
ले जाने को कुछ नहीं;
फिर भी क्यों चिंता करते हो,
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,
ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी !

-ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही...
ख़्वाहिशों का है !!
ना तो किसी को गम चाहिए,
ना ही किसी को कम चाहिए !!

-खटखटाते रहिए दरवाजा...,
एक दूसरे के मन का;
मुलाकातें ना सही,
आहटें आती रहनी चाहिए !!

-उड़ जाएंगे एक दिन ...,
तस्वीर से रंगों की तरह !
हम वक्त की टहनी पर...,
बेठे हैं परिंदों की तरह !!

-बोली बता देती है,इंसान कैसा है!
बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!
घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है !
संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!

-ना राज़ है... "ज़िन्दगी",
ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी";
बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!

-जीवन की किताबों पर,
बेशक नया कवर चढ़ाइये;
पर...बिखरे हुए पन्नों को भी,
पहले प्यार से चिपकाइये !!
गुर्जर इतिहास/ रोजगार से जुडी खबरों /मारवाड़ी मसाला के लिए ब्लॉग  पढे  :-https://gurjarithas.blogspot.com

Monday, February 10, 2020

जिंदगी क्या है!




कभी तानों में कटेगी,
कभी तारीफों में;
ये जिंदगी है यारों,
पल पल घटेगी !!

पाने को कुछ नहीं,
ले जाने को कुछ नहीं;
फिर भी क्यों चिंता करते हो,
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,
ये जिंदगी है यारों पलपल घटेगी!

बार बार रफू करता रहता हूँ,
..जिन्दगी की जेब !!
कम्बखत फिर भी,
निकल जाते हैं...,
खुशियों के कुछ लम्हें !!

ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही...
ख़्वाहिशों का है !!
ना तो किसी को गम चाहिए,
ना ही किसी को कम चाहिए !!

खटखटाते रहिए दरवाजा...,
एक दूसरे के मन का;
मुलाकातें ना सही,
आहटें आती रहनी चाहिए !!

उड़ जाएंगे एक दिन ...,
तस्वीर से रंगों की तरह !
हम वक्त की टहनी पर...,
बेठे हैं परिंदों की तरह !!

बोली बता देती है,इंसान कैसा है!
बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!
घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है।
संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!

ना राज़ है... "ज़िन्दगी",
ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी";
बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!

जीवन की किताबों पर,
बेशक नया कवर चढ़ाइये;
पर...बिखरे पन्नों को,
पहले प्यार से चिपकाइये !!
गुर्जर इतिहास व मारवाड़ी कविता के लिए ब्लॉग  पढे  :https://gurjarithas.blogspot.com   इस ब्लॉग को FOLLOW जरूर करे...

Thursday, February 6, 2020

जीवन में कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो!


जीवन में कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो,
आगे-आगे बढना है ,तो हिम्मत हारे मत बैठो.
तेज दौड़ने वाला खरहा ,दो पद चलकर हार गया,
धीरे-धीरे चलकर कछुआ ,देखो बाजी मार गया.
चलो कदम से कदम मिलकर ,तुम भी प्यारे मत बैठो.
आगे-आगे बढना है तो ,हिम्मत हारे मत बैठो.
चलने वाला मंजिल पाता बैठा पीछे रहता है
ठहरा पानी सड़ने लगता,बहता निर्मल होता है.
पाव दिए चलने की खातिर पाव पसारे मत बैठो
जीवन में कुछ करना है तो,मन को मारे मत बैठो.
आगे-आगे बढना है तो ,हिम्मत हारे मत बैठो.
धरती चलती तारे चलते ,चांद रात भर चलता है
किरणों का उपहार बाटने,सूरज रोज निकलता है.
हवा चले चलने के खातिर,तुम भी प्यारे मत बैठो
आगे-आगे बढना है तो,हिम्मत हारे मत बैठो.
जीवन में कुछ करना है तो ,मन को मारे मत बैठो
आगे-आगे बढ़ना है तो ,हिम्मत हारे मत बैठो.
गुर्जर इतिहास व मारवाड़ी कविता के लिए ब्लॉग  पढे  :-https://gurjarithas.blogspot.com

सम्पूर्ण कथा जानने के लिएं इस ब्लॉग को FOLLOW जरूर करे...

Thursday, January 23, 2020

26 जनवरी हिन्दी भाषण

हिन्दी  भाषण 
गुर्जर इतिहास व मारवाड़ी कविता के लिए ब्लॉग  पढे  :-https://gurjarithas.blogspot.com

Tuesday, January 21, 2020

26 जनवरी पर भाषण मारवाड़ी में (Republic Day Speech in Marwari)


26 जनवरी -- भाषण

 इण ज्ञान रे मिंदर रा पुजारी आदरजोग म्हारा व्हाला हेड माटसाब, म्हाने ज्ञान रो मारग बतावण वाळा माटसाब,अर मंच माथे बिराजियोडा घण मुंगा पावणा, गांव रा अणमोल निपजियोडा रतना जिसा म्हारा बडेरा, मोटयारा, गांव रे हर घर री स्यान म्हारी मातावा, बहना अर फुला ज्यूँ सुगंध देवंता , मूळकता म्हारी पाठशाला रा सगळा पढ़ेसरिया आप सगळा ने म्हारो निवण !
 आप सगळा ने जाणकारी में ह के आज रो दिन आपणे देश सारू कितो महताऊ ह आज आपणे देश रे सगळा नर नारियां सारू उछब रो दिन ह आज आपा सगळा इण महताऊ बेळा अठे भेळा हुया हा
आज रे ही दिन 26 जनवरी 1950 ने आपणे देश रो संविधान लागू हुयो हो, 26 जनवरी 1950 ने आपणो देश भारत प्रजातांत्रिक गण तंत्र बण्यो, गणतंत्र रो अरथ हुवे क जनता सारू जनता रो राज

इण स्यु पेला री बात करा तो आपाने याद राखणो चाइजै के आपणो देश विदेशी ताकता री  गुलामी री सांकळा स्यु जकडियोड़ो हो !
आपणे देश रा महान लोगा जीणा में सुभाषचन्द्र बोस,भगतसिंह,राजगुरु,चन्द्रशेखर आजाद, लाल-बाल-पाल, महात्मा गांधी , भीमराव अंबेडकर आद आपरो सों कीं निछावर करयो जणा आपाने आजादी मिली
आजादी रे बाद देश ने आछी तरया चलावण सारू कीं नैम कायदा अर एक सांवठे ढांचे री जरूरत ही अर बो ढांचों ही आपणो संविधान गिणीजै!
आपणे संविधान ने बणण में 2 साल 11 महीना अर 18 दिन रो बगत लाग्यो , आपणो संविधान दुनिया रो सगळा स्यु लांठो अर लिखित संविधान गिणीजै
इण संविधान में आपणे देश रे हर धरम ,समाज, मिनख,लुगाई ,टाबर, ने पालण-पोषण, फळन-फूळन,अर उन्नति सारू कीं नेम कायदा बणाइज्या ह
सगळा रे विकास में ही आपणे देश रो विकास ह 


आओ आपा सगळा इण पावन बेळा ओ परण लेवा क
(1) आपा संविधान में दियोड़ा अधिकारा सारू हका सारू हमेशा जागरूक रेवाला
(2) अधिकारा रे सागे सागे संविधान में दियोड़ा कर्तव्या री पालना कराला!
(3)आपणे मान सम्मान , भाषा ,संस्कृति री रिछया सारू पुरजोर प्रयास(खेचळ)कराला
(4)इस्यो कोई काम नी कराला जिको नीति रे विरुद्ध हुवे!
(5)देश री अबखाई , तरक्की सारू हमेशा त्यार रेवाला!
छेवट में  आप सगळा रो मोकळो आभार क आप म्हारी बात ने ध्यान स्यु सुणी
जै हिन्द
सगळा सु हाथ जोड़ विनती ह के इण राजस्थानी भाषा में लिख्योडे भाषण ने 26 जनवरी ने हर स्कूल में बोलावो अर आपणी भाषा रे लोगा ने चेतावो
इणने आगे स्यु आगे (शेयर) करो सा
गुर्जर इतिहास व मारवाड़ी कविता के लिए ब्लॉग  पढे  :-https://gurjarithas.blogspot.com

सम्पूर्ण कथा जानने के लिएं इस ब्लॉग को FOLLOW जरूर करे...

Sunday, January 19, 2020

जिंदगी क्या है !

*गुलज़ार ने कितनी खूबसूरती से बता दिया जिंदगी क्या है।*

-कभी तानों में कटेगी, 
कभी तारीफों में;
ये जिंदगी है यारों, 
पल पल घटेगी !!
-पाने को कुछ नहीं, 
ले जाने को कुछ नहीं;
फिर भी क्यों चिंता करते हो,
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,
ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी !
-बार बार रफू करता रहता हूँ,
...जिन्दगी की जेब !!
कम्बखत फिर भी, 
निकल जाते हैं...,
खुशियों के कुछ लम्हें !!

-ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही...
ख़्वाहिशों का है !!
ना तो किसी को गम चाहिए,
ना ही किसी को कम चाहिए !!

-खटखटाते रहिए दरवाजा...,
एक दूसरे के मन का;
मुलाकातें ना सही,
आहटें आती रहनी चाहिए !!

-उड़ जाएंगे एक दिन ...,
तस्वीर से रंगों की तरह !
हम वक्त की टहनी पर...,
बेठे हैं परिंदों की तरह !!

-बोली बता देती है,इंसान कैसा है!
बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!
घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है !
संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!

-ना राज़* है... "ज़िन्दगी",
ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी";
बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!

-जीवन की किताबों पर,
बेशक नया कवर चढ़ाइये;
पर...बिखरे पन्नों को,
पहले प्यार से चिपकाइये !!

Wednesday, January 8, 2020

कलेंडर बदलिए अपनी संस्कृति नही!



अपनी संस्कृति की झलक को अवश्य पढ़ें और साझा करें ।।
1 जनवरी को क्या नया हो रहा है ?

* न ऋतु बदली.. न मौसम
* न कक्षा बदली... न सत्र
* न फसल बदली...न खेती
* न पेड़ पौधों की रंगत
* न सूर्य चाँद सितारों की दिशा
* ना ही नक्षत्र।।
1 जनवरी आने से पहले ही सब नववर्ष की बधाई देने लगते हैं। मानो कितना बड़ा पर्व हो।
नया केवल एक दिन ही नही
कुछ दिन तो नई अनुभूति होनी ही चाहिए। आखिर हमारा देश त्योहारों का देश है।
ईस्वी संवत का नया साल 1 जनवरी को और भारतीय नववर्ष (विक्रमी संवत) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। आईये देखते हैं दोनों का तुलनात्मक अंतर:

1. प्रकृति-
एक जनवरी को कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी.. वही चैत्र मास में चारो तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति नया साल मना रही हो I

2. मौसम,वस्त्र-

दिसम्बर और जनवरी में वही वस्त्र, कंबल, रजाई, ठिठुरते हाथ पैर.. लेकिन
चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है, गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है I

3. विद्यालयो का नया सत्र- दिसंबर जनवरी मे वही कक्षा कुछ नया नहीं..
जबकि मार्च अप्रैल में स्कूलो का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यालयों में नया साल I

4. नया वित्तीय वर्ष-

दिसम्बर-जनबरी में कोई खातो की क्लोजिंग नही होती.. जबकि 31 मार्च को बैंको की (audit) क्लोजिंग होती है नए बही खाते खोले जाते है I सरकार का भी नया सत्र शुरू होता है I

5. कलैण्डर-

जनवरी में नया कलैण्डर आता है..
चैत्र में नया पंचांग आता है , उसी से सभी भारतीय पर्व, विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं I इसके बिना हिन्दू समाज जीवन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग 

6. किसानो का नया साल- दिसंबर-जनवरी में खेतो में वही फसल होती है..
जबकि मार्च-अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानो का नया वर्ष और उत्साह 

7. पर्व मनाने की विधि-

31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर शराब पीते है, हंगामा करते है, रात को पीकर गाड़ी चलने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश..

जबकि भारतीय नववर्ष व्रत से शुरू होता है पहला नवरात्र होता है घर घर मे माता रानी की पूजा होती है | शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है |

8. ऐतिहासिक महत्त्व- 1 जनवरी का कोई ऐतिहासिक महत्व नही है..
जबकि चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत, भगवान झूलेलाल का जन्म, नवरात्रे प्रारंम्भ, ब्रम्हा जी द्वारा सृष्टि की रचना इत्यादि का संबंध इस दिन से है|

एक जनवरी को अंग्रेजी कलेंडर की तारीख और अंग्रेज मानसिकता के लोगो के अलावा कुछ नही बदला..
अपना नव संवत् ही नया साल है |
जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य चाँद की दिशा, मौसम, फसल, कक्षा, नक्षत्र, पौधों की नई पत्तिया, किसान की नई फसल, विद्यार्थीयों की नई कक्षा, मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते है। जो विज्ञान आधारित है |
अपनी मानसिकता को बदले  विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने। स्वयं सोचे की क्यों मनाये हम 1 जनवरी को नया वर्ष..?

"एक जनवरी को कैलेंडर बदलें.. अपनी संस्कृति नहीं"
आओ जागेँ जगायेँ, भारतीय संस्कृति अपनायेँ और आगे बढ़े|
गुर्जर इतिहास व मारवाड़ी कविता के लिए ब्लॉग  पढे  :-https://gurjarithas.blogspot.com

सम्पूर्ण कथा जानने के लिएं इस ब्लॉग को FOLLOW जरूर करे...

वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो!


वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
चाय का मजा रहे, प्लेट पकौड़ी से सजा रहे
मुंह कभी रुके नहीं, रजाई कभी उठे नहीं
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
मां की लताड़ हो या बाप की दहाड़ हो
तुम निडर डटो वहीं, रजाई से उठो नहीं
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
मुंह भले गरजते रहे, डंडे भी बरसते रहे
दीदी भी भड़क उठे, चप्पल भी खड़क उठे
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
प्रात हो कि रात हो, संग कोई न साथ हो
रजाई में घुसे रहो,  तुम वही डटे रहो
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
एक रजाई लिए हुए एक प्रण किए हुए
अपने आराम के लिए, सिर्फ आराम के लिए
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
कमरा ठंड से भरा, कान गालीयों से भरे
यत्न कर निकाल लो,ये समय तुम निकाल लो
ठंड है यह ठंड है, यह बड़ी प्रचंड है
हवा भी चला रही, धूप को डरा रही
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो।।

रजाई धारी सिंह दिनकर
गुर्जर इतिहास व मारवाड़ी कविता के लिए ब्लॉग  पढे  :-https://gurjarithas.blogspot.com

सम्पूर्ण कथा जानने के लिएं इस ब्लॉग को FOLLOW जरूर करे...