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बगड़ावत देवनारायण फड़ भाग -30

देवनारायण एवं सोखिया पीर पीरजी को साथ लेकर देवनारायण धार नगरी से अपने डेरे हटाकर रवाना होते हैं। धार से चलने के बाद आगे आकर वे लोग सोनीयाना के बीहड़ (जंगल) में आकर विश्राम करते हैं। भगवान देवनारायण तो पांच पहर की नींद में सो जाते हैं। सोनियाना के जं… Read more

बगड़ावत देवनारायण फड़ भाग -29

देवनारायण एवं पीपलादे का विवाह नाग कन्या और दैत्य कन्या से विवाह करने के बाद भगवान देवनारायण गढ़ गाजणा से धार के किवाड़ गज दन्त और नीम दन्त के सिर पर लदवाकर धार नगरी में भेज देते हैं। धार नगरी के बाहर दोनों राक्षस दरवाजे वापस लगा देते हैं। सुबह धार नग… Read more

बगड़ावत देवनारायण फड़ भाग -28

देवनारायण का एवं नाग कन्या से विवाह गढ गाजणा के बाहर देवनारायण राक्षसों को मारना शुरु करते हैं। एक को मारे दो हो जाऐं , दो मारे चार हो जाऐं। राक्षसों के खून की बूंदें जमीन पर गिरते ही नये राक्षस पैदा हो जाते। ये देखकर देवनारायण अपने दायें पांव से ६४ … Read more