ONLINE GURUJI: प्रेरणादायक प्रेरक प्रसंग

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Thursday, May 21, 2020

!! गुजरा हुआ वक्त दुबारा नहीं आता !!


 प्रेरक प्रसङ्ग
     

एक नगर में एक बहुत ही अमीर आदमी रहता था, उस आदमी ने अपना सारा जीवन पैसे कमाने में लगा दिया, उसके पास इतना धन था, कि वह उस नगर को भी ख़रीद सकता था, लेकिन उसने अपने संपूर्ण जीवन भर में कभी किसी की मदद तक नही की। इतना धन होने के बावजूद, उसने अपने लिए भी उस धन का उपयोग नही किया, न कभी अपनी पसंद के कपड़े, भोजन, एवं अन्य इच्छा की पूर्ति तक नही की।

वह केवल अपने जीवन में पैसे कमाने में व्यस्त रहा, वह इतना व्यस्त एवं मस्त हो गया पैसा कमाने में उसे उसके बुढ़ापे का भी पता नही चला, और वह जीवन के आख़िरी पड़ाव पर पहुँच गया। इस तरह उसके जीवन का अंतिम दिन भी नज़दीक आ गया और यमराज उसके प्राण लेने धरती पर आये, जिसे देख कर वह आदमी डर गया, यमराज ने कहा, “अब तेरे जीवन का अंतिम समय आ गया है, और मै तुझे अपने साथ ले जाने आया हूँ।

सुनकर वह आदमी बोला – “प्रभु अभी तक तो मैंने अपना जीवन जिया भी नही, मै तो अभी तक आपने काम में व्यस्त था”, अतः मुझे अपनी कमाई हुई धन दौलत का उपयोग करने के लिए समय चाहिए। यमराज ने उत्तर दिया – “मैं तुम्हें और समय नही दे सकता, तुम्हारे जीवन के दिन समाप्त हो गये है, और अब दिनों को और नही बढाया जा सकता

यमराज की यह बात सुनकर उस आदमी ने कहा- प्रभु मेरे पास इतना पैसा है, आप चाहो तो आधा धन लेकर मुझे जीवन का एक और बर्ष दे दीजिये। प्रतियुत्त्तर में यमराज ने कहा ऐसा संभव नही। इस पर आदमी ने कहा – “आप चाहो, तो मेरा 90 प्रतिशत धन लेकर मुझे 1 महीने का समय ही दे दीजिए।यमराज ने फिर मना कर दिया।फिर आदमी ने कहा- आप मेरा सारा धन लेकर 1 ही घंटा दे दीजिये

तब यमराज ने उसको समझाया बीते हुए समय को धन से दोबारा प्राप्त नही किया जा सकता। इस प्रकार जिस आदमी को अपने धन पर अभिमान था, उसे वह सब व्यर्थ लगने लगा, क्योंकि उसने अपना संपूर्ण जीवन उस व्यर्थ चीज को कमाने में लगा दिया, जो आज उसे जिंदगी का 1 घंटा भी ख़रीद के नही दे पाई। दुखी मन से वह अपनी मौत के लिए तैयार हो गया।


सीख -
तो दोस्तों, आपने देखा की जिस आदमी ने अपना संपूर्ण जीवन जिसको कमाने में लगा दिया, वही चीज उसके लिए एक सेकंड का समय भी नही ख़रीद पाई। जीवन भगवान द्वारा दिया गया वहुमुल्य उपहारों में से एक है, जिसको पैसे से प्राप्त नही किया जा सकता। इसलिए जीवन के हर पल का आनंद लीजिये एवं उसको एन्जॉय करिए। कहा गया है जीवन बहुत अमूल्य है, इसको व्यर्थ ना जाने दे, हर पल को ख़ुशी के साथ जिए तभी आप अपने जीवन से खुश हो सकते है।    

!! मजदूर के जूते !!


 प्रेरक प्रसङ्ग

   
एक बार एक शिक्षक संपन्न परिवार से सम्बन्ध रखने वाले एक युवा शिष्य के साथ कहीं टहलने निकले . उन्होंने देखा की रास्ते में पुराने हो चुके एक जोड़ी जूते उतरे पड़े हैं , जो संभवतः पास के खेत में काम कर रहे गरीब मजदूर के थे जो अब अपना काम ख़त्म कर घर वापस जाने की तयारी कर रहा था .

शिष्य को मजाक सूझा उसने शिक्षक से कहा , “ गुरु जी क्यों न हम ये जूते कहीं छिपा कर झाड़ियों के पीछे छिप जाएं ; जब वो मजदूर इन्हें यहाँ नहीं पाकर घबराएगा तो बड़ा मजा आएगा !!शिक्षक गंभीरता से बोले , “ किसी गरीब के साथ इस तरह का भद्दा मजाक करना ठीक नहीं है . क्यों ना हम इन जूतों में कुछ सिक्के डाल दें और छिप कर देखें की इसका मजदूर पर क्या प्रभाव पड़ता है !!

शिष्य ने ऐसा ही किया और दोनों पास की झाड़ियों में छुप गए. मजदूर जल्द ही अपना काम ख़त्म कर जूतों की जगह पर आ गया. उसने जैसे ही एक पैर जूते में डाले उसे किसी कठोर चीज का आभास हुआ , उसने जल्दी  से जूते हाथ में लिए और देखा की अन्दर कुछ सिक्के पड़े थे , उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और वो सिक्के हाथ में लेकर बड़े गौर से उन्हें पलट -पलट कर देखने लगा.

फिर उसने इधर -उधर देखने लगा , दूर -दूर तक कोई नज़र नहीं आया तो उसने सिक्के अपनी जेब में डाल लिए . अब उसने दूसरा जूता उठाया , उसमे भी सिक्के पड़े थे मजदूर भावविभोर हो गया , उसकी आँखों में आंसू आ गए , उसने हाथ जोड़ ऊपर देखते हुए कहा – “हे भगवान् , समय पर प्राप्त इस सहायता के लिए उस अनजान सहायक का लाख -लाख धन्यवाद।

उसकी सहायता और दयालुता के कारण आज मेरी बीमार पत्नी को दावा और भूखें बच्चों को रोटी मिल सकेगी. "मजदूर की बातें सुन शिष्य की आँखें भर आयीं . शिक्षक ने शिष्य से कहा – “ क्या तुम्हारी मजाक वाली बात की अपेक्षा जूते में सिक्का डालने से तुम्हे कम ख़ुशी मिली ?”


शिक्षा :-
शिष्य बोला , “ आपने आज मुझे जो पाठ पढाया है , उसे मैं जीवन भर नहीं भूलूंगा . आज मैं उन शब्दों का मतलब समझ गया हूँ जिन्हें मैं पहले कभी नहीं समझ पाया था कि लेने  की अपेक्षा देना कहीं अधिक आनंददायी है . देने का आनंद असीम है . देना देवत्त है .

!! बोध कथा : अहंकार !!


 प्रेरक प्रसङ्ग

      

बहुत समय पहले की बात है| एक गाँव में एक मूर्तिकार ( मूर्ति बनाने वाला ) रहता था| वह ऐसी मूर्तियाँ बनता था, जिन्हें देख कर हर किसी को मूर्तियों के जीवित होने का भ्रम हो जाता था| आस-पास के सभी गाँव में उसकी प्रसिद्धि थी, लोग उसकी मूर्तिकला के कायल थे| इसीलिए उस मूर्तिकार को अपनी कला पर बड़ा घमंड था|

जीवन के सफ़र में एक वक़्त एसा भी आया जब उसे लगने लगा की अब उसकी मृत्यु होने वाली है, वह ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाएगा| उसे जब लगा की जल्दी ही उसकी मृत्यु होने वाली है तो वह परेशानी में पड़ गया| यमदूतों को भ्रमित करने के लिए उसने एक योजना बनाई| उसने हुबहू अपने जैसी दस मूर्तियाँ बनाई और खुद उन मूर्तियों के बीच जा कर बैठ गया|

यमदूत जब उसे लेने आए तो एक जैसी ग्यारह आकृतियों को देखकर दंग रह गए| वे पहचान नहीं कर पा रहे थे की उन मूर्तियों में से असली मनुष्य कौन है| वे सोचने लगे अब क्या किया जाए| अगर मूर्तिकार के प्राण नहीं ले सके तो सृष्टि का नियम टूट जाएगा और सत्य परखने के लिए मूर्तियों को तोड़ा गया तो कला का अपमान हो जाएगा| अचानक एक यमदूत को मानव स्वाभाव के सबसे बड़े दुर्गुण अहंकार को परखने का विचार आया| उसने मूर्तियों को देखते हुए कहा, “कितनी सुन्दर मूर्तियाँ बने है।

लेकिन मूर्तियों में एक त्रुटी है| काश मूर्ति बनाने वाला मेरे सामने होता, तो में उसे बताता मूर्ति बनाने में क्या गलती हुई है”| यह सुनकर मूर्तिकार का अहंकार जाग उठा, उसने सोचा मेने अपना पूरा जीवन मूर्तियाँ बनाने में समर्पित कर दिया भला मेरी मूर्तियों में क्या गलती हो सकती है”| वह बोल उठा कैसी त्रुटी”… झट से यमदूत ने उसे पकड़ लिया और कहा बस यही गलती कर गए तुम अपने अहंकार में, कि बेजान मूर्तियाँ बोला नहीं करती”…

शिक्षा -
कहानी का तर्क यही है, कि इतिहास गवाह है, अहंकार ने हमेशा इन्सान को परेशानी और दुःख के सिवा कुछ नहीं दिया”|