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बगडावत कथा -28

बगडावत कथा - 28 खेडा चौसला आकर मेहन्दू जी देवनारायण से मिले। देवनारायण से मिलने के बाद मेहन्दू जी साडू माता से भी मिले क्योंकि मेहन्दू जी देवनारायण के बड़े भाई थे इसलिए साडू माता ने उनको राजगद्दी सौंप दी और उनका राजतिलक कर दिया। फिर दोनों भाईयों ने साडू माता और… Read more

बगडावत कथा -27

बगडावत कथा - 27 जब राजा बिसलदेव को पता चलता है कि मेहन्दू जी ने बिजौरी को जेवर दिये हैं तो वो बहुत नाराज होते हैं। और उनको मरवाने की साजिश करते हैं। मेहन्दू जी को मारने की साजिश के लिये राण के रावजी के यहां संदेश भेजते हैं कि सवाई भोज का लड़का मेहन्दू जी मेरी आ… Read more

बगडावत कथा -26

बगडावत कथा - 26 बाबा रुपनाथ की बात सुनकर बिजौरी अपने डेरे लादकर आगे बढ़ जाती है और पाटन आकर डेरा डाल देती है। वहां तेजाजी से मिलकर बाकी बगड़ावतों और अपने आधे जेवरके बारे में पूछती हैं। तेजाजी बिजौरी को बताते है कि तू अजमेर चली जा वहां पर सवाई भोज का लड़का मेहन्द… Read more

बगडावत कथा -25

बगडावत  कथा - 25 वहां से भांगीजी को साथ लेकर नारायण का काफिला मंगरोप में आकर रुकता है जहां साडू माता और हीरा दासी ने ११ वर्ष पहले बिलोना बिलोया था और बची हुई छाछ नीचे गिरा दी थी। माता साडू नारायण से कहती है कि नारायण अब अपनी धरती आने वाली है उससे पहले आप पीपलद… Read more

बगडावत कथा -24

बगडावत कथा - 24 भैरूजी पता लगाकर बताते हैं। भगवान देवधा नाम की जगह में एक पेड़ है जिस पर बगुले बैठे हुए हैं और वो हराभरा हैं। देवनारायण उस पेड़ के नीचे आकर अपने भाले से पाताल में मारते हैं ,  देवनारायण का भाला वहां छुपे हुए सोखिया पीर को जाकर लगता है। पहले तो खून… Read more

बगडावत कथा -23

बगडावत  कथा - 23 गढ़ गाजणा के बाहर देवनारायण राक्षसों को मारना शुरु करते हैं। एक को मारे दो हो जाऐं ,  दो मारे चार हो जाऐं। राक्षसों के खून की बूंदें जमीन पर गिरते ही नये राक्षस पैदा हो जाते। ये देखकर देवनारायण अपने दायें पांव से ६४ जोगणीयां और ५२ भैरुओं को बाह… Read more

बगडावत कथा -22

बगडावत कथा - 22 साडू माता सोचती है कि भाटजी तो जीवित ही वापस आ गये है। इसलिए भाटजी के खाने में जहर मिला देती है। देवनारायण और भाटजी साथ में खाना खाने बैठते हैं। भगवान को सारी बात का पता होता है कि भाट के खाने में जहर मिला हुआ है। जब साडू माता खाना परोसती है तब… Read more