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बगडावत कथा -25

बगडावत  कथा - 25 वहां से भांगीजी को साथ लेकर नारायण का काफिला मंगरोप में आकर रुकता है जहां साडू माता और हीरा दासी ने ११ वर्ष पहले बिलोना बिलोया था और बची हुई छाछ नीचे गिरा दी थी। माता साडू नारायण से कहती है कि नारायण अब अपनी धरती आने वाली है उससे पहले आप पीपलद… Read more

बगडावत कथा -24

बगडावत कथा - 24 भैरूजी पता लगाकर बताते हैं। भगवान देवधा नाम की जगह में एक पेड़ है जिस पर बगुले बैठे हुए हैं और वो हराभरा हैं। देवनारायण उस पेड़ के नीचे आकर अपने भाले से पाताल में मारते हैं ,  देवनारायण का भाला वहां छुपे हुए सोखिया पीर को जाकर लगता है। पहले तो खून… Read more

बगडावत कथा -23

बगडावत  कथा - 23 गढ़ गाजणा के बाहर देवनारायण राक्षसों को मारना शुरु करते हैं। एक को मारे दो हो जाऐं ,  दो मारे चार हो जाऐं। राक्षसों के खून की बूंदें जमीन पर गिरते ही नये राक्षस पैदा हो जाते। ये देखकर देवनारायण अपने दायें पांव से ६४ जोगणीयां और ५२ भैरुओं को बाह… Read more

बगडावत कथा -22

बगडावत कथा - 22 साडू माता सोचती है कि भाटजी तो जीवित ही वापस आ गये है। इसलिए भाटजी के खाने में जहर मिला देती है। देवनारायण और भाटजी साथ में खाना खाने बैठते हैं। भगवान को सारी बात का पता होता है कि भाट के खाने में जहर मिला हुआ है। जब साडू माता खाना परोसती है तब… Read more

बगडावत कथा -21

बगडावत  कथा - 21 इधर छोछू भाट को भगवान देवनारायण की याद आती है कि अब भगवान नारायण ११ बरस के हो गये होगें। उन्हें मालवा जाकर बताना चाहिये कि उन्हें अपने बाप और काका का बैर लेना है। छोछू भाट अपनी माताजी डालू बाई को अपने साथ लेकर मालवा चल पड़ता हैं। ४ - ५   दिनों … Read more

बगडावत कथा -20

बगडावत कथा - 20 साडू माता सोचती है कि रोज कोई न कोई यहां आता है ,  कहीं रावजी सेना भेजकर बच्चे को भी न मरवा दे। यह सोचकर वह गोठां छोड़ कर मालवा जाने की तैयारी करती है। और दूसरे ही दिन साडू माता अपने विश्वासपात्र भील को बुलवाती है। बच्चे का जलवा पूजन करने के पश्… Read more

बगडावत कथा -19

बगडावत कथा - 19 इधर सभी बगड़ावतों का नाश हो जाने पर साडू माता हीरा दासी सहित मालासेरी की डूंगरी पर रह रही होती है। एक दिन अचानक वहाँ पर नापा ग्वाल आता है और सा माता को ७ बीसी राजकुमारों के भी मारे जाने का समाचार देता है और कहता है कि साडू माता यहां से मालवा अपने … Read more