प्रत्येक वेद की गद्य रचना ब्राह्मण ग्रंथ कहलाती है|
        वेद              ब्राह्मण
    ऋग्वेद        कौषीतकी व ऐतरेय
·          यजुर्वेद      तैत्तिरीय व शतपथ
      सामवेद      पंचविश व जैमिनीय
    अथर्ववेद      गोपथ ब्राह्मण
·        ऐतरेय ब्राह्मण में राजसूय यज्ञ व यज्ञ के समय राजा द्वारा ली जाने वाली शपथो का उल्लेख है|
       कौषीतकी ब्राह्मण में विभिन्न यज्ञो का वर्णन  
       शतपथ ब्राह्मण संकलन याज्ञवल्क्य समन्ध शुक्ल यजुर्वेद पद्य से
   शतपथ ब्राह्मण सबसे प्राचीन व सबसे बड़ा ब्राह्मण
   शतपथ ब्राह्मण को लघु वेद एव ऐतिहासिक वेदवाज सहिंता भी कहते है|
    तैत्तिरीय ब्राह्मण संकलन याज्ञवल्क्य समन्ध कृष्ण यजुर्वेद गद्य से
    गोपथ ब्राह्मण में सर्वप्रथम अश्वमेघ यज्ञ का उल्लेख है|
आरण्यक
·        आरण्यक शब्द अरण्य से बना है जिसका अर्थ है जंगल या वन
     आरण्यक दार्शनिक ग्रंथ है जिसके विषय में आत्मा परमात्मा जन्म मृत्यु पुनर्जन्म इत्यादि है|
       सर्वप्रथम आरण्यक ग्रंथो में चारो आश्रमों का उल्लेख 1.ब्रह्मचर्य आश्रम 2.गृहस्थ आश्रम 3.वानप्रस्थ आश्रम 4. सन्यास आश्रम
        आरण्यक ज्ञान मार्ग व कर्म मार्ग के बीच  सेतु का कार्य करते हैं|
उपनिषद
·        उपनिषद का शाब्दिक अर्थ है गुरु के समीप बैठकर या एकांत में सीखा गया ज्ञान
     कुल उपनिषद् की संख्या 108
     इन्हें वेदांत भी कहते हैं क्योंकि यह वैदिक साहित्य का अंतिम भाग है और यह वेदों का सर्वोच्च व अंतिम उद्देश्य बताते है|
    छान्दोग्य उपनिषद सबसे प्राचीन उपनिषद माना जाता हैं|                       इसमे सर्वप्रथम देवकी पुत्र श्री कृष्ण का उल्लेख है|
    जाबालोपनिषद में सर्वप्रथम चारो आश्रमों का उल्लेख किया है|
    कठोपनिषद में यम नचिकेता संवाद  का वर्णन  
      सत्यमेव जयते भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य मुंडकोपनिषद् से लिया गया
      सत्यमेव जयते को टूटी फूटी नोकाओ के समान कहा गया   

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