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Gurjar History

Friday, May 29, 2020

ब्राह्मण ग्रंथ



प्रत्येक वेद की गद्य रचना ब्राह्मण ग्रंथ कहलाती है|
        वेद              ब्राह्मण
    ऋग्वेद        कौषीतकी व ऐतरेय
·          यजुर्वेद      तैत्तिरीय व शतपथ
      सामवेद      पंचविश व जैमिनीय
    अथर्ववेद      गोपथ ब्राह्मण
·        ऐतरेय ब्राह्मण में राजसूय यज्ञ व यज्ञ के समय राजा द्वारा ली जाने वाली शपथो का उल्लेख है|
       कौषीतकी ब्राह्मण में विभिन्न यज्ञो का वर्णन  
       शतपथ ब्राह्मण संकलन याज्ञवल्क्य समन्ध शुक्ल यजुर्वेद पद्य से
   शतपथ ब्राह्मण सबसे प्राचीन व सबसे बड़ा ब्राह्मण
   शतपथ ब्राह्मण को लघु वेद एव ऐतिहासिक वेदवाज सहिंता भी कहते है|
    तैत्तिरीय ब्राह्मण संकलन याज्ञवल्क्य समन्ध कृष्ण यजुर्वेद गद्य से
    गोपथ ब्राह्मण में सर्वप्रथम अश्वमेघ यज्ञ का उल्लेख है|
आरण्यक
·        आरण्यक शब्द अरण्य से बना है जिसका अर्थ है जंगल या वन
     आरण्यक दार्शनिक ग्रंथ है जिसके विषय में आत्मा परमात्मा जन्म मृत्यु पुनर्जन्म इत्यादि है|
       सर्वप्रथम आरण्यक ग्रंथो में चारो आश्रमों का उल्लेख 1.ब्रह्मचर्य आश्रम 2.गृहस्थ आश्रम 3.वानप्रस्थ आश्रम 4. सन्यास आश्रम
        आरण्यक ज्ञान मार्ग व कर्म मार्ग के बीच  सेतु का कार्य करते हैं|
उपनिषद
·        उपनिषद का शाब्दिक अर्थ है गुरु के समीप बैठकर या एकांत में सीखा गया ज्ञान
     कुल उपनिषद् की संख्या 108
     इन्हें वेदांत भी कहते हैं क्योंकि यह वैदिक साहित्य का अंतिम भाग है और यह वेदों का सर्वोच्च व अंतिम उद्देश्य बताते है|
    छान्दोग्य उपनिषद सबसे प्राचीन उपनिषद माना जाता हैं|                       इसमे सर्वप्रथम देवकी पुत्र श्री कृष्ण का उल्लेख है|
    जाबालोपनिषद में सर्वप्रथम चारो आश्रमों का उल्लेख किया है|
    कठोपनिषद में यम नचिकेता संवाद  का वर्णन  
      सत्यमेव जयते भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य मुंडकोपनिषद् से लिया गया
      सत्यमेव जयते को टूटी फूटी नोकाओ के समान कहा गया   

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वेदों से समन्धित महत्वपूर्ण बिंदु !




वेद
वेद की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के विद शब्द से जिसका अर्थ जानना
भाषा -संस्कृत
लिपि ब्राह्मी
संकलन महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेद व्यास रचना
महर्षि वेदव्यास के तीन अन्य नाम
कृष्ण द्वैपायन    (द्वीप में पैदा होने वाला)
बादरायण           (बद्रीनाथ में रहने वाला)
वेदव्यास            (वेदों का संकलन करने वाला)

स्थल वेदों की रचना सप्त सैंधव क्षेत्र पंजाब में हुई
वेदों के अन्य नाम (नित्य, श्रुति, अपौरूषेय ,संहिता)
वेदों पर लिखित अंग्रेजी भाषा की पहली पुस्तक मैक्स मूलर कृत सीक्रेड बुक ऑफ द ईस्ट
वेद भारत के सबसे प्राचीन धर्म ग्रंथ है|
वेद चार है (ऋग्वेद] यजुर्वेद] सामवेद] अथर्ववेद)
ऋग्वेद] यजुर्वेद] सामवेद वेद त्रयी
ऋग्वेद (प्राचीनतम)
           ऋग्वेद में दस मंडल 1028 श्लोक
      ऋग्वेद में अग्नि सूर्य इंद्र वरुण देवताओं की स्मृति में  की  गई प्रार्थना का वर्णन है|
   ऋग्वेद के दसवें मंडल पुरुष सूक्त का उल्लेख आता है जिसमें चार वर्ण(ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शूद्र) का उल्लेख मिलता है|
      नासदीय सूक्त इसमें ऋग्वैदिक कालीन 40 नदियों का उल्लेख किया गया है
    सबसे पवित्र नदी      सरस्वती
     सबसे प्रसिद्ध नदी      सिंधु
     सबसे अंतिम नदी     गोमल (गोमती)

  • गायत्री मंत्र ओम भूर्भुव स्व तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न प्रचोदयात् का उल्लेख ऋग्वेद के तीसरे मंडल में मिलता है यह मंत्र सूर्य की स्तुति में है|
  • यजुर्वेद (गद्य और पद्य यानी चंपू में)
  • यजुर्वेद का अर्थ है यज्ञ या यज्ञ के नियम एवं विधि की चर्चा की जाती है इसमें इसका पाठ करने वाले ब्राह्मणों को अध्वर्यु कहतें  है|
  •  यजुर्वेद को दो भागों में बांटा गया है कृष्ण यजुर्वेद गद्य शुक्ल यजुर्वेद पद्य
  • सामवेद (भारतीय संगीत का जनक)
  • सामवेद सामवेद का अर्थ है गान या संगीत  जिसे सामयोति कहते हैं|
  • सामवेद के पाठ करने वाले को उद्गाता
  • अथर्ववेद (अंतिम व नवीन)
  • अथर्ववेद का नाम अथर्वा व अंगिरस दो ऋषियों के नाम पर पड़ा|
  • अथर्ववेद का अर्थ है पवित्र जादू अथर्ववेद में रोग निवारण राज भक्ति विवाह अंधविश्वासों का वर्णन है इसमें राजा परीक्षित को कुरूओ का राजा कहा गया है|
  • अथर्ववेद के अन्य नाम श्रेष्ट वेद,ब्रह्म्वेद,भोतिक वेद,लोकिक वेद व नवीन वेद
नोट :- पंचम वेद के रूप में महाभारत को जाना  जाता है|
वेदों के उपवेद
      ऋग्वेद    आयुर्वेद
       यजुर्वेद     धनुर्वेद
      सामवेद     गंधर्व वेद
       अथर्ववेद    शिल्प वेद
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प्राचीनकालीन ऐतिहासिक महाकाव्य



रामायण
भारत का आदि महाकाव्य रामायण
रचयिता वाल्मीकि
भाषा संस्कृत  लिपि ब्राह्मी
रचनाकाल 550 B.C
इसे चतुर्विशति साहस्री संहिता भी कहा जाता है ! 
रामायण में सात कांड 500 सर्ग व 24000  श्लोक
1.बालकांड राम का बचपन
    2.अयोध्याकांड राम का राज्याभिषेक
    3.अरण्यकांड पंचवटी में निवास व सूर्पनखा रावण की बहन से भेंट
    4.किस्किंधाकांड राम सुग्रीव से मित्रता
    5.सुंदरकांड हनुमान द्वारा सीता को सांत्वना
    6.युद्धकांड रावण पर राम की विजय सबसे बड़ा कांड है इसे लंका कांड भी कहते है !   
    7.उत्तरकांड रावण वध राम की अयोध्या वापसी
रामायण का फारसी अनुवाद अबुल कादिर बदायूनी ने किया
तमिल में अनुवाद कंबन ने किया
महाभारत
·         विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य
·         महाभारत रचयिता महर्षि वेदव्यास
      भाषा संस्कृत लिपि ब्राह्मी
      रचनाकाल 400 B.C
      जय का अर्थ  है विजय संबंधी
   श्लोको के अधार पर नामकरण
   8000 श्लोक थे तब नाम जय सहिंता
   24000 श्लोक थे तब नाम भारत
   100000 श्लोक थे तब नाम शतसाहस्री सहिंता
      महाभारत का प्रारंभिक उल्लेख आस्वलाय्न गृह सूत्र में मिलता है
महाभारत में कुल 18 सर्ग/पर्व है
1 आदि पर्व 2 सभा पर्व 3 वन पर्व 4 विराट पर्व 5 उद्योग पर्व 6 भीष्म पर्व 7 द्रोण पर्व 8 कर्ण पर्व
9 शल्य पर्व 10 सौप्तिक पर्व 11 स्त्री पर्व 12 शांति पर्व 13 अनुशासन पर्व 14 अश्वमेघ पर्व 15 आश्रमवासी पर्व    16 मोसल पर्व 17 महाप्रस्थानिक पर्व 18 स्वर्गारोहण पर्व

·         भीष्म पर्व का भाग  गीता कहलाता है इसमें कर्म भक्ति ज्ञान का संगम मिलता है
·         गीता में ही सर्वप्रथम अवतारवाद का उल्लेख किया गया है
·         सबसे बड़ा शांति पर्व है
श्रीमद भागवत गीता
उल्लेख भीष्म पर्व में
शिक्षा : निष्काम कर्म योग व पुनर्जन्म
सम्पूर्ण अध्याय  18 (6 भक्ति , 6 ज्ञान , 6 कर्म )
हिंदी अनुवाद : बाल गंगाधर तिलक  (गीता रहस्य)
संस्कृत अनुवाद : शंकराचार्य (गीता भाष्य )
फारसी  अनुवाद : दारा शिकोह  (गीता)

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