मुद्दतों   बाद  देखा आज ,मेरे शहर को साँस आयी है
रहने दो गलियां  वीरान  ही ,कि  खबर कुछ खास आयी है
घर मे कैद  रहने वाला ,आजाद है 'मौत' के  शिकंजे से
जो निकला है बाहर आवारा बनके ,मौत उसी के  पास आयी है
शहर शहर धुआँ  धुआँ  ,हर तरफ गुबार  था
बरसों बाद साफ आसमां पर दिखी ,नीली चादर  छायी  है
पैसों  की खनक ,अमीरी  की ललक में,छोड़ चला जो देश अपना
अरसे  बाद उस परदेशी को ,गाँव  की याद आयी है
खूब हुई ये आपाधापी , टीं  टीं  पों  पों  ,भागमभाग ,
देख ज़िन्दगी तेरे घर पर ,सुकूं का अहसास लाई  है
बड़ा नाज था तुझको तेरी , ताकत ओर रईसी  का
एक छोटे से 'वायरस' ने तुझको, तेरी औकात  दिखाई  है
है खौफ़ का मंजर हर शख्स के अंदर ,ये केसी  लीला रचायी  है
कुदरत तेरी मार के आगे ,अच्छे अच्छों   ने  मुँहकी खाई  है