Gurjar History : March 2020

Gurjar History

Tuesday, March 31, 2020

घर से ही कोरोना को bye bye करोना!


मैं चाहता हूँ....
कई महीनो बाद,
तुम एक रोज़ मुझे Call करो,
और वो Call, Receive ही न की जाये...
फिर तुम एक और कोशिश करो,
Call करने की,
और फिर Receive न हो...
फिर एक अरसे बाद,
तुम्हे थोड़ी फ़िक्र हो,
तुम Message करो मुझे...
वो Messages
जिसका कोई भी जवाब
अब कभी नहीं आएगा...
फिर तुम सच में
थोडे और परेशान हो जाओ...
तुम सोचो मेरे बारे में,
मेरी हर बात,
मेरी आवाज़,मेरा चेहरा...
तुम्हारे लिए मेरी फ़िक्र..
मेरे साथ बिताया हर एक लम्हा..
फिर तुम मुझे एक और Call करो,
और फिर कोई Response न मिले,
तुम फिर मुझे Message करो,
जिसका कोई जवाब न मिले..
तुम अचानक बहुत बेचैन हो जाओ,
तुम्हें सब कुछ याद आता रहे,
तुम लगातार मेरे बारे में सोचो...
तुम्हे सब कुछ याद आये..
सब कुछ...
और एक दिन जब तुम्हें नींद न आये..
बस मेरी याद आये...
तुम मुझे Social Media पर ढूँढो..
फिर Message करो..
फिर Call करो..
फिर कोई जवाब न मिले..
तब तुम Phone Gallery खोलकर..
मेरी तस्वीरें देखो...
तुम्हे गुस्सा आये,
चीढ हो, तुम्हे रोना आये..
तुम्हें एहसास हो
कि मैं किस हाल में रह रहा हूँ..?
परेशान होना क्या होता है..?
टूट जाना क्या होता है...?
फिर कुछ अच्छा ही नहीं लगेगा..
तब तुम हर जगह मुझे ही ढूँढो,
रह रह मेरी बातों को याद करो,
मेरी ठिठोलियो को याद करो,,
मेरी मस्तियाँ तुम्हे हर जगह बिखरी नजर आए,
मेरी नादानियां तुम्हे रह रह सताए,
मेरा आना जाना तुम्हे हर ओर नजर आए,,
मेरा तुम्हारे लिए हाजिर होना, तुम्हारी चिंताओं में तुम्हारे साथ फिक्रमंद  होना, तुम्हारे आनंद में साथ साथ नाच करना, तुम्हारे एक फोन पर तुम कहो वहां आ जाना,
क्योंकि मैं चाहता  हूँ..
तुम एक बार महसूस कर सको..
वो सब
जो मैं करता  हूँ...!!
दोस्तो ,, ये स्थिति हम में से कोई नही चाहेगा,
में किसी को खोना नही चाहता,
ओर तुम भी तो नहीं ना,
जिंदगी जी रहे थे उसे गोर से देखने का मौका मिला है  ,, देख लो,, पहचान लो, कौन है दोस्त जान लो, कौन है भाई जान लो, कौन है पत्नी जान लो,,कौन है बहन जान लो, मा बाबा बीवी बच्चे दोस्त सबको जान लो, सबकी फिक्र है तो अब खुद की फिक्र कर लो , खुद के लिए नही तो उनके लिए कर लो, तुम दुनिया के लिए एक शख्स हो , पर किसी एक शख्स के लिए पूरी दुनिया हो , खुद को बचा लो कइयों की दुनिया बच जाएगी ,

घरो में रुक जाओ ना, कुछ देर थम जाओ ना,,
जिंदगी का इंटरवेल है इसे the end नही करोंना।।

घर से ही कोरोना को bye bye करोना।।

मेरे शहर को साँस आयी है!


मुद्दतों   बाद  देखा आज ,मेरे शहर को साँस आयी है
रहने दो गलियां  वीरान  ही ,कि  खबर कुछ खास आयी है
घर मे कैद  रहने वाला ,आजाद है 'मौत' के  शिकंजे से
जो निकला है बाहर आवारा बनके ,मौत उसी के  पास आयी है
शहर शहर धुआँ  धुआँ  ,हर तरफ गुबार  था
बरसों बाद साफ आसमां पर दिखी ,नीली चादर  छायी  है
पैसों  की खनक ,अमीरी  की ललक में,छोड़ चला जो देश अपना
अरसे  बाद उस परदेशी को ,गाँव  की याद आयी है
खूब हुई ये आपाधापी , टीं  टीं  पों  पों  ,भागमभाग ,
देख ज़िन्दगी तेरे घर पर ,सुकूं का अहसास लाई  है
बड़ा नाज था तुझको तेरी , ताकत ओर रईसी  का
एक छोटे से 'वायरस' ने तुझको, तेरी औकात  दिखाई  है
है खौफ़ का मंजर हर शख्स के अंदर ,ये केसी  लीला रचायी  है
कुदरत तेरी मार के आगे ,अच्छे अच्छों   ने  मुँहकी खाई  है

इक्कीस दिन इक्कीस दोहे।"


   
पर घर पग ना मैलणो,
                  कित्ती करें मनवार ।
अरज करे है आपने,
                             भारत री सरकार ।।1
कोरोना ने रोकणो,
                  पहले रूकजो आप ।
नी रूक्या जै आज तो,
                  पछै रहत पछताप ।।2
दवा नहीं इण रोग री,
                   बचिया ही उपचार ।
हैं रती भर मिनखपणो,
                  मत आजो थे बा'र ।।3
हाथ मिलाणो छोड ने,
                      दूर सूं नमस्कार ।
मास्क लगा ने बोलजो,
                    ओ ही है उपचार ।।4
साबु सूं हाथ धोवजो,
                 दिन में दस-दस बार ।
तो ही रुकसी देस में,
                    कोरोना परसार ।।5
कोरोना रे कोप सूं,
                    मचियो हाहाकार ।
मिनख हुवो तो मानजो,
                  मत आजो थै बा'र ।।6
पुलिस खड़ी है सड़क पर,
                   सब री पहरेदार ।
ऐकर मन सूं बोलजो,
              इन की जय जयकार ।।7
अठी उठी नी जावणो,
                घर में कर विसराम ।
मान सला सरकार री,
                  पूरण होसी काम ।।8
ठंडी चीजों सूं भला,
                 करजो थै परहेज ।
पछै भली थै खावजो,
                  थोड़ी करलो जेज ।।9
जै चावो थै देस में,
               कल खुशियों रो ताज ।
सरकारी आदेश को,
                सगळा मानो आज ।।10
खबर सही अखबार री,
                जिण रो कर परसार ।
झूठी अफवा इण घड़ी,
                मत मानो नर नार ।।11
भारत रो परधान भी,
                सबनै जोड़े हाथ ।
समय बितावो आपरो,
                 घरवालों रै साथ ।।12
धरती रे भगवान री,
                सेवा आठो याम ।
दूर करे ऐ रोग ने,
                 आप करो विसराम ।।13
भामासा भी जोर रो,
                  कर रहिया उपकार ।
घर में बैठे कीजिए,
               इन का भी सत्कार  ।।14
संकट री इण टेम में,
                 सब करजो उपकार ।
भूखे पेट गरीब ने,
                    रोटी री मनवार ।।15
काळाबाजारी कठी,
                    मत करजो रै सेठ ।
मजबूरी रो फायदो,
                 कितोक भरसी पेट ।।16
सीएम ने सलाम है,
                   सजग करिया प्रांत ।
काफी हद तक हो गयो,
                    कोरोना भी शांत ।।17
मिलनै री वैळा नहीं,
                   मन सूं राखो मेळ ।
घर वासो भगवान रो,
                  मत मानो थै जेळ ।।18
पढ़ो किताबों ज्ञान री,
                   और पढ़ो अखबार ।
 दुनिया भर री खबर सूं,
                   पावो सच्चो सार ।।19
घर बैठा मत भूलजो,
                    करलो वांने याद ।
जिण रै कारण दैस री,
                    सीमाएं आबाद ।।20
इक्कीस दोहे हर दिन,
                   पढ़ता रहजो आप ।
नरेंद्र मोदी री वीणती,
                घर ने राखो साफ ।।21

Wednesday, March 25, 2020

नीबू पानी पिओ सौ साल जिओ


 पेप्सी  बोली  सुन  कोका कोला।
भारत का इन्सान है बहुत भोला।।

विदेश  से   मैं   आयी  हूँ।
साथ में मौत को लायी हूँ।।

लहर   नहीं   ज़हर   हूँ  मैं।
गुर्दों पर गिरता कहर हूँ मैं।।

मेरी  पी.एच.  दो पॉइन्ट सात।
मुझ में गिरकर गल जायें दाँत।।

जिंक  आर्सेनीक  लेड   हूँ  मैं।
काटे आतों को, वो ब्लेड हूँ मैं।।

हाँ    दूध     मुझसे    सस्ता    है।
फिर पीकर मुझको क्यों मरना है।।

540 करोड़ कमाती हूँ।
विदेश में  ले  जाती  हूँ।।

मैं  पहुँची  हूँ  आज वहाँ पर।
पीने को नहीं पानी जहाँ पर।।

छोड़ो  नकल   अब  अकल  से जियो।
और जो कुछ पीना संभल के ही पियो।।

बच्चों को  यह  कविता  सुनाओ।
नीबू पानी पिओ सौ साल जिओ।।



नर पर नारी भारी है..!


एक दिन पत्नी का अच्छा मूड देख,
           मौके का भरपूर फायदा उठाया,
बरसों से दिमाग में उठते सवाल को,
           बहुत हिम्मत से पत्नी के सामने उठाया।
मैंने कहा, प्रिय एक राज की बात बताना...
            साफ बताना, कुछ भी तो न छुपाना,
एक सवाल करता हमें परेशान है..
             इस बात से सारे मर्द बहुत हलकान है।
पत्नी ने आँखे तरेरी, भौहें चढाई..
             मैं डरा अब बस होने वाली है लड़ाई,
लेकिन पत्नी ने कुछ दया दिखाई..
             पूछने के लिए अपनी सहमति दर्शाई।
मैंने कहा कि एक बात बताओ..
             इस राज से पर्दा आज उठाओ।
नारियाँ क्यों सदा एक ही पति चाहती है...?
सातों जन्म उसी पति पर हक जताती है....?
क्या हम इतने प्यारे हैं जो हम पर मरती हो....?
हमें सदा पाने को सब इतने व्रत करती हो.....?
सुनकर पत्नी कुटिलता से मुस्कुराई..... 😊
           अपना मुंह खोलकर बतीसी चमकाई
बोली आप ये क्या अनर्गल कह रहे हो.....?
            कौन सी मूर्खों की दुनिया में रह रहे हो?
मेरे पिया ये प्यार नहीं "समझदारी" है
            इसके पीछे ये ही सोच हमारी है
एक जन्म में तुम्हे गधे से इंसान बनाया है
            कूट- पीट के तुम्हे "जोरु का गुलाम" बनाया है
अब जो हर जन्म में नया पति पाएंगी...
           तो उसे सुधारने में फिर जन्म गवाएंगी
ये सोचकर ही हम वो ही पति चाहती हैं,
            कैसा भी हो, सात जन्म उस पर हक जताती हैं...

मैं समझ गया
 ये प्यार नहीं होशियारी है,
सदा याद रखो नर पर नारी भारी है..!