Gurjar History : रामचंद्रजी की बाललीला

Gurjar History

Monday, February 3, 2020

रामचंद्रजी की बाललीला



जब रामचंद्रजी बालक थे, तो माता कौसल्या ने उन्हें नहलाकर पालने में सुला दिया और पूजा करने लगीं। फिर जब वे रसोई में जाकर लौटीं, तो उन्होंने देखा कि उनका पुत्र पूजाघर में बैठा हुआ था और भगवान का भोग खा रहा था। कौसल्याजी डर गईं कि अभी कुछ देर पहले ही तो इसे पालने में सुलाकर आई थी, यहाँ किसने लाकर बैठा दिया? वे घबराकर पालने के पास पहुंची, तो उन्होंने रामचंद्रजी को वहीं सोया देखा। फिर पूजाघर लौटने पर उन्होंने देखा कि रामचंद्रजी वहाँ बैठकर भगवान का भोग खा रहे हैं। रामचंद्रजी के दो जगहों पर होने की लीला देखकर माता कौसल्या घबरा गईं। तब रामचंद्रजी ने उन्हें अपना अखंड अद्भुत रूप दिखलाया, जिसे देखने के बाद कौसल्याजी ने कहा कि हे प्रभु, मुझे आपकी माया अब कभी व्यापे! इसके बाद राम ने बाललीलाएँ तो की, लेकिन माता को अपना विराट स्वरूप दोबारा कभी नहीं दिखाया।
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