Gurjar History : जीवन में कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो!

Gurjar History

Thursday, February 6, 2020

जीवन में कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो!


जीवन में कुछ करना है तो, मन को मारे मत बैठो,
आगे-आगे बढना है ,तो हिम्मत हारे मत बैठो.
तेज दौड़ने वाला खरहा ,दो पद चलकर हार गया,
धीरे-धीरे चलकर कछुआ ,देखो बाजी मार गया.
चलो कदम से कदम मिलकर ,तुम भी प्यारे मत बैठो.
आगे-आगे बढना है तो ,हिम्मत हारे मत बैठो.
चलने वाला मंजिल पाता बैठा पीछे रहता है
ठहरा पानी सड़ने लगता,बहता निर्मल होता है.
पाव दिए चलने की खातिर पाव पसारे मत बैठो
जीवन में कुछ करना है तो,मन को मारे मत बैठो.
आगे-आगे बढना है तो ,हिम्मत हारे मत बैठो.
धरती चलती तारे चलते ,चांद रात भर चलता है
किरणों का उपहार बाटने,सूरज रोज निकलता है.
हवा चले चलने के खातिर,तुम भी प्यारे मत बैठो
आगे-आगे बढना है तो,हिम्मत हारे मत बैठो.
जीवन में कुछ करना है तो ,मन को मारे मत बैठो
आगे-आगे बढ़ना है तो ,हिम्मत हारे मत बैठो.
गुर्जर इतिहास व मारवाड़ी कविता के लिए ब्लॉग  पढे  :-https://gurjarithas.blogspot.com

सम्पूर्ण कथा जानने के लिएं इस ब्लॉग को FOLLOW जरूर करे...