RBSE/BSER Class 12 Hindi Grammer

व्याकरण भाषा, व्याकरण एवं लिपि

भाषा –‘भाषाशब्द की व्युत्पत्ति भाषाशब्द संस्कृत की भाष्धातु से बना है। भाष्धातु का अर्थ है = (भाष व्यक्तायां वाचि) व्यक्त वाणी
परिभाषा  व्यक्त वाणी के रूप में जिसकी अभिव्यक्ति की जाती है, उसे भाषाकहते हैं।
इस प्रकार भाषा के दो रूप हो गए
1.    मौखिक
2.    लिखित
(1) मौखिक भाषा – साधारणतया बोलचाल की भाषा को मौखिक भाषा कहते हैं। जैसे-नेताजी के भाषण सुनकर जनता उत्साह से भर उठी। यहाँ नेताजी का भाषण मौखिक भाषा का उदाहरण है।
(2) लिखित भाषा – जेब उच्चरित ध्वनि संकेतों को निश्चित चिहनों या ध्वनि संकेतों द्वारा लिखकर अंकित किया जाता है, उसे लिखित भाषा कहते हैं। जैसे-परीक्षार्थी उत्तरपुस्तिका पर प्रश्न हल कर रहे हैं। इसके लिए वे भाषा के निश्चित चिह्नों का प्रयोग कर रहे हैं। अत: यह लिखित भाषा है।
मौखिक व लिखित भाषा में अंतर
1.    मौखिक रूप से बोलने पर वाक्य छोटे-छोटे होते हैं, जबकि लिखित रूप में बड़े होते हैं, जैसे कादंबरीग्रंथ में एक-एक पृष्ठ के वाक्य हैं।
2.    मौखिक भाषा स्वाभाविक होती है, जबकि लिखित भाषा कृत्रिम होती है।
3.    मौखिक भाषा पर स्थानीय बोलियों का प्रभाव रहता है, जबकि लिखित रूप में नहीं होता, क्योंकि लेखक सतर्क होकर लिखता है।
4.    मौखिक भाषा परिवर्तनशील होती है, जबकि लिखित भाषा स्थिर होती है।
5.    मौखिक भाषा में सदैव ताजगी रहती है, जबकि लिखित भाषा रूढ़ और प्राचीनता से युक्त रहती है।
भाषा के विविध रूप  अनेक व्यक्तियों के संपर्क में रहने के कारण भाषा के अनेक रूप हो जाते हैं, जैसे
(1) मूल भाषा – आज विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं के मूल में भी एक ही भाषा रही होगी चाहे अभी हमें उसका ज्ञान नहीं है, किंतु भाषा के पारिवारिक वर्गीकरण में लगभग दस भाषाओं को मान्यता दी जाती है। आधुनिक भारतीय आर्य-भाषाओं की मूल भाषा भारोपीय परिवारहै।
(2) विभाषा – प्रांतीय यो उपप्रांतीय आधार पर वर्गीकृत होने पर भाषाओं को विभाषाकहा जाता है। इन भाषाओं में शासन का कार्य संचालन भी होता है, जैसे-पंजाबी, गुजराती, मराठी आदि।
(3) बोली – प्रांतीय स्तर के शासन कार्य के लिए प्रयुक्त न होने वाली मंडलीय स्तर पर स्वीकृत तथा जिसमें साहित्यिक रचनाएँ भी होती हैं, उन भाषाओं को बोलीकहा जाता है, जैसे-मगही, भोजपुरी, मालवी, ढूँढ़ाड़ी आदि।
(4) उपबोली – प्रत्येक व्यक्ति की भाषा में दूसरे व्यक्ति की भाषा से अंतर होता है। व्यक्तिगत बोली ही सामूहिक रूप में प्रयुक्त होने पर उप-बोली बनती है। उससे बोली और विभाषा की सृष्टि होती है। | भाषा की इकाइयाँ-भाषा की निम्न इकाइयाँ हैं
1.    ध्वनि  हमारे मुँह से निकलने वाली प्रत्येक स्वतंत्र आवाज ध्वनिकहलाती है। भाषा के मौखिक रूप में केवल ध्वनियों का ही प्रयोग होता है।
2.    वर्ण  वर्ण ध्वनि के रूप में ही वक्ता के मुख से उच्चरित होता है। यह भाषा की सबसे छोटी इकाई है, जिसके और टुकड़े नहीं हो सकते। जैसे. क्, , ट् आदि।
3.    शब्द  वर्गों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं। जैसे -क + म + ल = कमल।
4.    पद  वाक्य में प्रयुक्त शब्द के व्यावहारिक रूप अथवा विभक्ति-युक्त शब्द को पदकहते हैं। जैसे- राम ने रावण को बाण से मारी। इस वाक्य में राम ने’, “रावण को’, ‘बाण सेऔर मारापद है।
5.    वाक्य  शब्दों के मेल से अब एक पूर्ण विचार प्रकट होता है, तो वह शब्द समूह वाक्यकहलाता है। जैसे-वह पुस्तक पढ़ रहा है।
 ‘व्याकरण का शाब्दिक अर्थ है-विश्लेषण करना। आशय यह है कि व्याकरण भाषा का विश्लेषण कर रचना को स्पष्ट करता है। व्याकरण की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है
व्याकरण वह शास्त्र है, जो हमें किसी भाषा के शुद्ध रूप को लिखने तथा बोलने के नियमों का ज्ञान कराता है।
वस्तुत : व्याकरण से नियमों में स्थिरता आती है। नियमों की स्थिरता से भाषा में एक प्रकार की मानकता स्थापित होती है। यही मानकता भाषा को परिनिष्ठित रूप प्रदान करती है। अत: व्याकरण ही ऐसा शास्त्र है जो भाषा को सर्वमान्य, शिष्ट-सम्मत एवं स्थायी रूप प्रदान करता है।
व्याकरण के अंग  भाषा की मूल ध्वनियों के लिखित चिह्नों को वर्ण कहते हैं। वर्षों के मेल से शब्द और पद बनते हैं। इनसे वाक्य का निर्माण होता है इस प्रकार व्याकरण के चार अंग हैं
1.    वर्ण विचार
2.    शब्द विचार
3.    पद विचार
4.    वाक्य विचार
1. वर्ण विचार-इसके अंतर्गत वर्षों से संबंधित उनके आकार, उच्चारण, वर्गीकरण तथा उनके मेल से शब्द-निर्माण प्रक्रिया को उल्लेख किया जाता है।
2.
शब्द-विचार-इसमें शब्द के भेद, उत्पत्ति, व्युत्पत्ति वे रचना आदि के साथ शब्द के प्रकारों का उल्लेख होता है।
3.
पद विचार-इसमें शब्द से पद निर्माण प्रक्रिया, पद के विविध रूपों का वर्णन होता है।
4.
वाक्य विचार-इसके अंतर्गत वाक्य से संबंधित उसके भेद, अन्वय, विश्लेषण, संश्लेषण, रचना-अवयव तथा वाक्य निर्माण प्रक्रिया की जानकारी दी जाती है।
लिपि जब भाषा को लिखित रूप की आवश्यकता पड़ी तो मौखिक ध्वनियों को अंकित करने के लिए कुछ चिह्न बनाए गए। ये चिह्न ही लिपिकहलाए।
परिभाषा  ”लिखित ध्वनि-संकेतों को लिपि कहते हैं।प्रत्येक भाषा की अपनी लिपि होती है, जैसे-हिन्दी, देवनागरी, अंग्रेजी-रोमन, उर्दू-फारसी, पंजाबी- गुरुमुखी लिपि में लिखी जाती है। देवनागरी लिपि का प्रयोग हिन्दी, मराठी, नेपाली, कोंकणी, संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश आदि भाषाओं में होता है।           
                                                            
देवनागरी लिपि
भारत की दो प्राचीन लिपियाँ थीं-ब्राह्मी लिपि और खरोष्ठी लिपि। इनमें से ब्राह्मी लिपि से ही देवनागरी लिपि का विकास हुआ। देवनागरी लिपि की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं
1.    यह बाईं से दाईं ओर लिखी जाती है।
2.    उच्चारण के अनुरूप लिखी जाती है।
3.    संपूर्ण लिपि-समूह स्वर और व्यंजन में विभक्त हैं।
4.    एक वर्ग के वर्षों का उच्चारण एक स्थान से होता है।
5.    इसकी ध्वनियों में संसार की किसी भी भाषा का उच्चारण किया जा सकता है।
6.    शिरोरेखा का प्रयोग होता है।
7.    उच्चरित वर्ण ही लिखे जाते हैं।
8.    अनुनासिक और अनुस्वार ध्वनियों के लिए पृथक् चिह्न हैं।
9.    इसमें स्वरों के लिए मात्राओं की निश्चित व्यवस्था है। मात्राओं का प्रयोग व्यंजनों और स्वरों के संयोग के समय होता है।
10. अक्षरों में सुडौलता है तथा वर्ण गोलाइयों से युक्त हैं।
11. वर्गों की स्पष्टता है।
12. यह रोमन लिपि की अपेक्षा कम स्थान घेरती है।
13. वर्ण-विभाजन में वैज्ञानिकता है।


पद परिचय वाक्य में प्रयुक्त पदों का व्याकरण की दृष्टि से पूरा परिचय देना ही पद-परिचय कहा जाता है। पद-परिचय को पद-व्याख्या, पदान्वय आदि भी कहा जाता है।

जब व्याकरण के नियमों के अनुसार शब्द को वाक्य में प्रयोग की योग्यता प्रदान की जाती है, तो वह पद कहलाता है। यह योग्यता विभक्ति, वचन, लिंग, काल आदि द्वारा प्राप्त होती है।
पद के भेद-पद के दो भेद किये गये हैं – 1. विकारी 2. अविकारी ।
1. विकारी पद-जिन पदों का स्वरूप लिंग, वचन, कारक तथा काल के अनुसार प्रयोग किये जाने पर परिवर्तित होता रहता है, वे विकारी पदकहे जाते हैं। विकारी पदचार प्रकार के होते हैं-
·         संज्ञा
·         सर्वनाम
·         विशेषण
·         क्रिया।
2. अविकारी पद – जो पद लिंग, वचन, कारक आदि के प्रयोग से अप्रभावित रहते हैं, वे अविकारी पद कहे जाते हैं। इन पदों को अव्यय भी कहा जाता है। अव्यय के चार प्रकार हैं-
·         क्रिया-विशेषण
·         विस्मयादिबोधक
·         सम्बन्ध-बोधक तथा
·         समुच्चयबोधक।
विकारी पद परिचय

संज्ञा   संज्ञा का अर्थ है-नामसंज्ञा पदों का पद परिचय 

   (i) संज्ञा पदों का अन्वय करते समय संज्ञा , उसका भेद, लिंग, वचन, कारक और अन्य पदों का परिचय देते हुए अन्य पदों से उसका संबंध भी दिखाना चाहिए |

अभिषेक पुस्तक पढ़ता है |  अभिषेक और  पुस्तक संज्ञा है| इसका परिचय निम्नानुसार होगा -  अभिषेक व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुर्ल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक , पढता है क्रिया का कर्ता|
पुस्तक  जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्म कारक, पढता है क्रिया का कर्म|

  (ii) सर्वनाम सर्वनाम का पद परिचय करते समय सर्वनाम का भेद , पुरुष , लिंग , वचन , कारक और अन्य पदों से उसका संबंध बताना पड़ता है |

 मै पुस्तक पढता हू|  मै सर्वनाम का पद परिचय
मै  पुरुषवाचक] सर्वनाम, उत्तम पुरुष , पुर्ल्लिंग,एकवचन,  पढता हू  क्रिया का कर्ता |

(iii) विशेषण के पद परिचय में संज्ञा और सर्वनाम की तरह लिंग ,वचन , कारक , और विशेष्य बताना चाहिए |

वीर राम ने सब राक्षसों का वध कर दिया |  वीर और सब विशेषण है  इनका पद परिचय
वीर  गुणवाचक विशेषण , मुलावस्था, पुर्ल्लिंग, एकवचन, राम विशेष्य के गुण का बोध कराता है |
 सब  संख्यावाचक  विशेषण, मुलावस्था, पुर्ल्लिंग, बहुवचन , राक्षसों विशेष्य कि संख्या  का बोध कराता है |

(iv) क्रिया – क्रिया के पद परिचय में क्रिया का प्रकार , वाच्य , पुरुष , लिंग , वचन , काल और वह शब्द जिससे क्रिया का सम्बन्ध है , सबकुछ बताना चाहिए |

राम ने रावण को बाण से मारा | मारा क्रिया का पद परिचय  
मारा  सकर्मक क्रिया , पुर्ल्लिंग, एकवचन ,कर्तवाच्य , भुतकाल , मारा क्रिया का कर्ता राम , कर्म रावण व करण बाण
अविकारी पद (अव्यय) परिचय
(1) क्रिया-विशेषण
   लड़के ऊपर खड़े है| ऊपर क्रिया-विशेषण  का पद परिचय
ऊपर  स्थान वाचक क्रिया-विशेषण, खड़े है क्रिया के स्थान का बोध  कराता है |
(2) सम्बन्धबोधक –  भोजन के बाद विश्राम करना चाहिए |
 के बाद  पद परिचय - सम्बन्धबोधक अव्यय , जो भोजन संज्ञा का समंध  विश्राम  के साथ जोड़ता है|
 (3) समुच्चयबोधक तृप्ति और गुंजन जा रही है|  और समुच्चयबोधक अव्यय  का पद परिचय
और  समुच्चयबोधक अव्यय  ,संयोजक, तृप्ति तथा  गुंजन दो संज्ञा  शब्दों को जोड़ता है|  
 (4) विस्मयादिबोधक – अरे ! यह क्या हो गया ?

अरे ! विस्मयादिबोधक अव्यय जो विस्मय के भाव का बोध कराता है|

रचना पत्र व प्रारूप लेखन

पत्र-लेखन
एक अच्छे पत्र की विशेषताएँ – पत्र-लेखन एक कला है। एक सुगठित और सन्तुलित पत्र ही उत्तम पत्र माना जाता है। एक अच्छे पत्र में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए
1.    संक्षिप्तता – पत्र में विषय का वर्णन संक्षेप में करना चाहिए। एक ही बात को बार-बार दोहराने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए।
2.    संतुलित भाषा का प्रयोग – पत्र में सरल, बोधगम्य भाषा का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, जिन्हें पत्र पाने वाला नहीं समझता हो।
3.    तारतम्यता – पत्र में सभी बातें एक तारतम्य से रखी जानी चाहिए। ऐसा न हो कि आवश्यक बातें तो छूट जाएँ और कम महत्त्व की बातों में पत्र का अधिकांश भाग प्रयुक्त हो जाए। पत्र में सभी बातें उचित क्रम में लिखी होनी चाहिए।
4.    शिष्टता – पत्र में संयमित, विनम्र और शिष्ट शब्दावली का प्रयोग किया जाना चाहिए। कड़वाहट-भरे शब्द लिखना या अशिष्ट भाषा का प्रयोग करना सर्वथा अनुचित है।
5.    सज्जा – पत्र को साफ-सुथरे कागज पर सुलेख में ही लिखा जाना चाहिए। तिथि, स्थान एवं सम्बोधन यथास्थान लिखने से पत्र में आकर्षण बढ़ जाती है।
पत्र के अंग जो बातें सामान्यत: सभी प्रकार के पत्रों में होती हैं, उन्हें पत्रों के आवश्यक अंग कहते हैं। एक पत्र के छह प्रमुख अंग होते हैं
1. संबोधन और अभिवादन – यह पत्र में बायीं ओर लिखा जाता है। पारिवारिक पत्रों में संबोधन लिखा जाता है, जैसेपूज्य पिताजी, प्रिय भाई आदि। सरकारी और व्यावसायिक पत्रों में संबोधन की विधि निर्धारित होती है, जैसे-महोदय, प्रिय महोदय। अभिवादन भी व्यक्ति के पद या मर्यादा के अनुरूप लिखे जाते हैं। जैसे-सादर प्रणाम, नमस्कार, आशीर्वाद लिखा जाता है।
2. पत्र भेजने की तिथि – अनौपचारिक पत्रों में पत्र भेजने वाले के पते के नीचे दिनांक, महीना और सन् लिखा जाः ।। औपचारिक पत्रों में दिनांक सबसे नीचे लिखा जाता है।
3. पत्र की विषय सामग्री – यह पत्र का मुख्य भाग है। इसी भाग में समाचार, सूचनाएँ, आवेदन, आदेश एव शिकायत आदि अलग-अलग अनुच्छेद में लिखा जाता है।
4. पत्र का अंत – पत्र के अंत में बायीं ओर ही पत्र लिखने वाले के द्वारा अपने संबंध या पद के अनुरूप शब्द, यथा-भवदीय, आपका, आज्ञाकारी, शुभेच्छु आदि लिखकर नीचे अपने हस्ताक्षर किए जाते हैं।
5. भेजने वाले का पता – बायीं ओर ही पत्र भेजने वाले का पता लिखा जाता है। इससे पत्र प्राप्त करने वाले को, पत्र भेजने वाले का सही-सही पता ज्ञात हो जाता है और उसे उत्तर भेजने में कठिनाई नहीं होती।
6. पत्र पाने वाले का पता – पत्र समाप्ति के बाद पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय पत्र तथा लिफाफे पर पत्र पाने वाले का स्पष्ट पता लिखा जाता है। पते के साथ पिनकोड अवश्य लिखना चाहिए।
संबोधन, अभिवादन तथा पत्र के अंत में प्रयुक्त शब्दों के कुछ सामान्य उदाहरण अग्रांकित प्रकार से हैं



अर्द्धशासकीय पत्र  जब सक्षम अधिकारी, समकक्ष अधिकारी को किसी खास विषय पर ध्यान आकृष्ट करने, स्पष्टीकरण देने, वैचारिक आदान-प्रदान करने, सूचना-सलाह आदि देने अथवा प्राप्त करने के लिए जिस पत्र का प्रयोग करते हैं, वे पत्र अर्द्धशासकीय पत्र कहलाते हैं।
अर्द्धशासकीय पत्र सामान्यत: सरकारी पत्र की भाँति होता है, परन्तु इसमें आत्मीय संबोधन व औपचारिक लगावपूर्ण भाषा का प्रयोग किया जाता है। संबोधन में प्रिय, श्री, सुश्री, श्रीमती के साथ सरनेम शर्मा, वर्मा, माथुर आदि जोड़कर लिखे जाते हैं। संबोधन को लेखक स्वयं अपने हाथ से लिखता है।
उदाहरण – 1 एक अर्द्धशासकीय पत्र, शासन सचिव, शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा आयुक्त, माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर को लिखकर विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण निर्माण हेतु ध्यान आकृष्ट किया जाए।
राजस्थान सरकार
विमल जैन
शासन सचिव
शिक्षा विभाग
शासन सचिवालय, जयपुर,
दि० 6 दिसम्बर, 2019
अशा०प०क्र० 128 /19-20
प्रिय वर्मा जी,
राजस्थान के सरकारी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय शिक्षा के आधारभूत केन्द्र हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्र के अधिकतर विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। अत: शैक्षणिक वातावरण निरंतर बनाये रखने के लिए विषयाध्यापकों की नियुक्ति, रिक्त पदों पर समायोजन द्वारा शिक्षण, समयबद्ध कार्य-योजना एवं शैक्षणिक कैलेण्डर अनुसार समस्त गतिविधियाँ संचालित की जानी चाहिए। इससे उत्तम व गुणवत्तापरक वातावरण निर्मित होगा।
आशा है आप अपनी श्रेष्ठ भूमिका से इस पुनीत कार्य में सफल होंगे।
धन्यवाद।
भवदीय
(
विमल  जैन)

उदाहरण 2 सचिव, शिक्षा विभाग, राजस्थान, जयपुर की ओर से आयुक्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को एक अर्द्धशासकीय पत्र लिखिए, जिसमें सरकारी विद्यालय के विद्यार्थियों की नियमित स्वास्थ्य जाँच का आग्रह हो।
राजस्थान सरकार
अभिषेक शर्मा
सचिव
शिक्षा विभा
शासन सचिवालय, जयपुर
दि० 6 दिसम्बर, 2019
अशा०प०क्र० 128 /19-20
प्रिय श्री गोविन्द जी,
आपको विदित है कि राजस्थान के लगभग 80% विद्यार्थी सरकारी विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्र में अध्ययनरत हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति मध्यम अथवा निम्न स्तर की है। इन विद्यार्थी के स्वास्थ्य की नियमित जाँच हेतु विभाग द्वारा नियमित रूप से शिविर लगाए जाते हैं। आप से आग्रह है कि जिला चिकित्सा अधिकारियों को अपनी विशिष्ट सेवाएँ इन शिविरों में देने हेतु पाबन्द करें, ताकि ग्रामीण-जीवन का एवं भावी नागरिकों का स्वास्थ्य उन्नत हो सके।
आशा है आपका सहयोग प्राप्त होगा। धन्यवाद।
भवदीय
ह०
(
अभिषेक शर्मा)

निविदा सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालयों की दैनिक आवश्यकताओं एवं किसी कार्य को संपन्न करवाने हेतु सार्वजनिक रूप से समाचार पत्रों में जो सूचना प्रकाशित की जाती है, उसे निविदा सूचना कहते हैं। इसका उद्देश्य कम लागत में गुणवत्तापरक कार्य करवाने का होता
उदाहरण – 1
राजस्थान सरकार
कार्यालय अधिशासी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग
बाड़मेर (राजस्थान)
क्रमांक :- निविदा 1 /2019-20
दिनांक-3 अप्रैल, 2019
निविदा सूचना सार्वजनिक निर्माण विभाग, बाड़मेर के अधीन निम्नलिखित कार्यों हेतु पंजीकृत अथवा श्रेणी संविदा धारकों से दिनांक 30 अप्रैल, 2019 तक दोहरे लिफाफे पद्धति में मोहरबंद निविदाएँ आमंत्रित की जाती हैं। निविदा प्रारूप कार्यालय समय में 100/- रुपये जमा करवा कर प्राप्त किया जा सकता है। प्राप्त निविदाएँ दिनांक 1 मई, 2019 को प्रातः 11:00 बजे उपस्थित निविदादाताओं के समक्ष खोली जायेगी।

शर्ते :-
1.    निविदा निरस्त अथवा स्वीकृत करने का अधिकार अधोहस्ताक्षरकर्ता के पास सुरक्षित रहेगा।
2.    निविदा शर्तों के अनुरूप कार्य न होने पर धरोहर राशि जब्त कर ली जायेगी।
3.    समस्त न्यायिक परिवादों का क्षेत्र बाड़मेर रहेगा।
(, , ,)
अधिशासी अभियंता
उदाहरण 2 
राजस्थान सरकार
आयुक्त, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, जयपुर
क्रमांक निविदा/प.क./164/(द)
दिनांक-19 जुलाई, 2019

निविदा सूचना राज्य के समस्त चिकित्सालयों में नि:शुल्क दवा वितरण हेतु पंजीकृत दवा कंपनियों से दिनांक 30 जुलाई, 2019 को सायं 5:00 बजे तक मोहरबंद निविदाएँ आमंत्रित की जाती हैं। निविदा प्रारूप कार्यालय समय में (रुपये) 100/- नकद जमा करवाकर प्राप्त किया जा सकता है। प्राप्त निविदाएँ दिनांक 31 जुलाई, 2019 को प्रातः 11:00 बजे उपस्थित निविदादाताओं के समक्ष खोली जायेंगी। कार्य-विवरण इस प्रकार है।
शर्ते :-
1.    निविदानुसार दरों पर वर्षपर्यन्त माँग के अनुसार सप्लाई नियत स्थान पर देनी होगी।
2.    भारतीय स्वास्थ्य मानकों का पालन करना होगा।
3.    निविदा शर्तों का उल्लंघन करने पर धरोहर राशि जब्त कर ली जायेगी।
4.    निविदा को निरस्त करने अथवा स्वीकृत करने का अधिकार अधोहस्ताक्षरकर्ता के पास सुरक्षित रहेगा।
5.    समस्त न्यायिक परिवादों को क्षेत्र जयपुर रहेगा।
(, , स)
आयुक्त
विज्ञप्ति सकारी अथवा गैर सरकारी विभाग अपने किसी निर्देश, घोषणा, निर्णय आदि से संबंधित सूचनाओं को जन-साधारण तक पहुँचाने हेतु जो आदेश जारी करते हैं, उन्हें विज्ञप्ति कहते हैं। विज्ञप्ति सरकारी गजट के अतिरिक्त समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाती है।
उदाहरण – 1
राजस्थान सरकार
कार्यालय निदेशक, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, जयपुर, राजस्थान
क्रमांक-890
दिनांक -12 जुलाई, 2019
विज्ञप्ति
प्रदेश के समस्त ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर दिनांक 15 जुलाई से 15 अगस्त 2019 के मध्य प्रशासन गाँवों के संग अभियानके अंतर्गत दो दिवसीय शिविर आयोजित होंगे। पंचायत वार विस्तृत कार्यक्रम उपखंड स्तर से निर्धारित किए जायेंगे। इन शिविरों में समस्त सरकारी विभागों के अधिकारी ग्रामीण जनता की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण करेंगे। अत: इसका लाभ उठाएँ व अन्य संबंधित को भी अवगत कराएँ।
(, , ग)
निदेशक
उदाहरण 2
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय
अजमेर (राज.)
क्रमांक-347
दिनांक-13 फरवरी, 2020
विज्ञप्ति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित B.A., BCom. एवं BSc. की लिखित परीक्षाएँ 20 फरवरी से आरंभ हो रही हैं। परीक्षार्थी अपना प्रवेश पत्र व समय-विभाग चक्र विश्वविद्यालय की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं अथवा संबंधित महाविद्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
(, , ग)
(,,स)
परीक्षा नियंत्रक
उदाहरण 3
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान
अजमेर
क्रमांक-1120
दिनांक-20 जून, 2020
विज्ञप्ति उच्च माध्यमिक परीक्षा-2020 की पूरक परीक्षाएँ 7 जुलाई, 2020 से समस्त पंचायत समिति मुख्यालयों पर आयोजित की जायेंगी। परीक्षार्थी अपने प्रवेश पत्र व समय-सारिणी बोर्ड की वेबसाइट से डाउनलोड कर लें। अन्य किसी भी प्रकार की सूचना हेतु संबंधित केन्द्राधीक्षक से संपर्क करें।
(
, , ग)

ज्ञापन शासकीय पत्र-व्यवहार में जब किसी सक्षम अधिकारी द्वारा समकक्ष या अधीनस्थ अधिकारियों अथवा कर्मचारियों को सामान्य सूचना, संदेश आदि देने के लिए जो पत्र लिखा जाता है, उसे कार्यालय ज्ञापन कहते हैं। इसका प्रयोग विविध मंत्रालयों, विभागों, अनुभागों के मध्ये पत्र व्यवहार हेतु होता है। इसमें संक्षिप्त एवं विषयनिष्ठ सामग्री होती है।
उदाहरण – 1
राजस्थान सरकार
उच्च शिक्षा विभाग, राजस्थान, जयपुर
ज्ञा, सं.-14 (द)/ 2019/03
दिनांक-4 अप्रैल, 2019
ज्ञापन विषय:- रिव्यू डी. पी. सी. बाबत्।
विभाग में डी. पी. सी. से संबंधित बकाया मामलों का त्वरित निस्तारण 31 मई, 2019 तक अनिवार्यत: किया जाना है। नवीन शिक्षा सत्र से पूर्व रिक्त पदों पर चयनित आचार्यों की नियुक्ति भी करें।
(ह०)
(
, , ,)
विशिष्ट सचिव

शासन सचिव
समस्त विभागाध्यक्ष
उदाहरण 2
राजस्थान सरकार
गृह मंत्रालय, जयपुर
ज्ञा. सं.-16 (अ)/142
दिनांक-3 मई, 2017
विषय :- जन समस्याओं के निस्तारण बाबत्।
समस्त विभागाध्यक्षों को सूचित किया जाता है कि राजस्थान में अकाल की विभीषिका से त्रस्त जनता की विविध समस्याओं को त्वरित निस्तारण आवश्यक है। अत: प्रशासन अपनी भूमिका का पूर्ण निष्ठा से निर्वहन करे।
ह०
(
, , ग)
उपशासन सचिव
सेवा में,
1.    समस्त मंत्रालय, राजस्थान सरकार।
2.    समस्त विभागाध्यक्ष।
3.    समस्त जिला कलक्टर।
उपशासन सचिव
सेवा में,
1.    समस्त सचिव/विभागाध्यक्ष, जि. सरकार, जयपुर।
2.    समस्त जिला कलक्टर।
उदाहरण 3
राजस्थान सरकार
शिक्षा विभाग
शासन सचिवालय,
जयपुर क्रमांक- ग्रुप-276 (द)/148
दिनांक-3 जनवरी, 2018
ज्ञापन
विषय : माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में विसंगतियों बाबत्।
माध्यमिक शिक्षा एवं उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में कई विसंगतियाँ सामने आ रही हैं। अत: विस्तृत समीक्षा के उपरांत ही नवीन पाठ्यक्रम लागू करें, ताकि अनावश्यक विवाद पैदा न हों। इस संदर्भ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मुख्य उद्देश्यों का पूर्णतः पालन किया जाना चाहिए। आशा है बेहतर तालमेल व विस्तृत कार्ययोजना का निर्माण कर कार्य पूर्ण किया जाएगा।
ह०
(
, , ग)
सेवा में,
1.    समस्त कुलपति, राजस्थान।
2.    सचिव, मा०शि० बोर्ड, राजस्थान, अजमेर।
अधिसूचना केन्द्र अथवा राज्य सरकार जब सरकारी आदेशों को आम जनता के लिए प्रसारित करती है, तो इन सूचनाओं को वैधानिक दृष्टि से अधिसूचना कहा जाता है। अधिसूचना के कुछ प्रारूप इस प्रकार हैं
उदाहरण – 1
राजस्थान सरकार
राजस्व विभाग
शासन सचिवालय, जयपुर
क्रमांक- साप्र०-/4 (क)/208
दिनांक-3 जुलाई, 2019
अधिसूचना राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 3 अंतर्गत उपधारा 16 (i) वे (ii) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भू-नामांतरण जो कि ग्राम पंचायतों की प्रदत्त शक्तियों से अनुशंसित था, के स्थान पर नायब तहसीलदारों व तहसीलदारों के अधिकार क्षेत्र में होगा।
यह अधिसूचना दिनांक 3 जुलाई, 2017 से 15 सितम्बर, 2019 तक प्रभावी रहेगी।
ह०
(
, , ग)
उपशासन सचिव
प्रतिलिपि सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु
1.    निजी सचिव, मुख्यमंत्री, राज० सरकार।
2.    निजी सचिव, मुख्यसचिव, राज० सरकार।
3.    निजी सचिव, राजस्वमंत्री राज सरकार।
4.    सचिव, नियामक राजस्व मंडल, अजमेर।
5.    निदेशक, राजकीय मुद्रणालय, जयपुर को प्रेषित कर लेख है कि अधिसूचना का प्रकाशन आगामी राजपत्र में किया जाए।
ह०
(
, , ग)
उपशासन सचिव

उदाहरण 2
राजस्थान सरकार
राजस्व विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर
पत्रांक-4 (स)/ 2019/214
दिनांक-15 अक्टूबर 2019
अधिसूचना
राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित प्रशासन गाँव की ओर–2017 के अंतर्गत जारी मूल निवास एवं जाति प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर हेतु तहसीलदार अधिकृत होंगे। यह अधिसूचना 31 दिसम्बर, 2019 अथवा अभियान संचालित होने तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी।
ह०
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उपशासन सचिव
प्रतिलिपि सूचनार्थ :
1.    निजी सचिव, माननीय मुख्यमंत्री, राजस्थान, जयपुर।
2.    निजी सचिव, मुख्य सचिव, राजस्थान, जयपुर।
3.    सचिव, राजस्व विभाग, जयपुर।
4.    समस्त जिला कलक्टर।
5.    निदेशक, राजकीय मुद्रणालय, निमित्त राजपत्र में प्रकाशनार्थ।
ह०
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, , स)
उपशासन सचिव
उदाहरण 3
राजस्थान सरकार
स्वायत्त शासन विभाग, शासन सचिवालय, जयपुर।
क्रमांक – 196
दिनांक-11 सितम्बर, 2019
अधिसूचना महामहिम राज्यपाल की अनुशंसा के आधार पर राज्य सरकार आदेश क्रमांक 33/12 (द)/ स्वच्छता 56 दिनांक 2.10.19  की अनुपालना में गाँधी जयन्ती पर प्रदेश के समस्त नगर निगमों, नगर परिषदों व नगरपालिकाओं द्वारा संपूर्ण स्वच्छता अभियान के अंतर्गत स्वच्छ नगर-स्वच्छ आवासअभियान चलाया जाएगा। अभियान में जन सहभागिता महत्त्वपूर्ण रहेगी।
ह०
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उपशासन सचिव
प्रतिलिपि सूचनार्थ
1.    समस्त विभागाध्यक्ष, राजस्थान सरकार, जयपुर।
2.    समस्त जिला कलक्टर।
3.    निदेशक राजकीय मुद्रणालय, निमित्त प्रकाशनार्थ।
ह०
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उपशासन सचिव


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